हरिद्वार।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को जनपद हरिद्वार में वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेंद्र दत्त के मार्गदर्शन में आयोजित लोक अदालत में लंबित और प्रीलिटिगेशन मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया।

लोक अदालत के लिए जिले में कुल 24 बेंच गठित की गई थीं। जिला न्यायालय परिसर रोशनाबाद में 13, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में एक, रुड़की स्थित बाह्य न्यायालय में सात और लक्सर में तीन बेंचों ने मामलों की सुनवाई की।

लोक अदालत में चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना क्लेम, पारिवारिक विवाद, सिविल वाद, श्रम विवाद, विद्युत अधिनियम, बैंक रिकवरी और फौजदारी के शमनीय प्रकृति के मामलों को प्राथमिकता दी गई। आपसी सहमति से मामलों का निस्तारण होने से पक्षकारों को त्वरित न्याय मिलने के साथ न्यायालयों में लंबित मुकदमों का बोझ भी कम हुआ।

लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित 3,918 मामलों का निस्तारण किया गया। वहीं 207 प्रीलिटिगेशन मामलों का भी समाधान हुआ। इस तरह कुल 4,125 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 18 करोड़ 57 लाख 35 हजार 981 रुपये की समझौता राशि का सेटलमेंट हुआ।

जिला जज नरेंद्र दत्त ने कहा कि लोक अदालत में कंपाउंडेबल ऑफेंस का निस्तारण किया जाता है। अधिक से अधिक लोग लोक अदालत का लाभ ले सकें इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से व्यापक विचार प्रसार किया जाता है।

डीएलएसए की सचिव सिमरनजीत कौर ने लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और वादकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत त्वरित न्याय का प्रभावी माध्यम है। आपसी सुलह से वर्षों से चले आ रहे विवाद समाप्त होने के साथ पक्षकारों के बीच कटुता कम होती है और आपसी सद्भाव बढ़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *