हरिद्वार में बनेगा मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, सीएम ने की समीक्षा

हरिद्वार में बनेगा मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, सीएम ने की समीक्षा

ब्यूरो

Posted no : 05/05/2026

देहरादून।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक कर ऋषिकुल, हरिद्वार में मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार की योजनाओं की समीक्षा की। इस मौके पर संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल आस्था और अध्यात्म की भूमि नहीं, बल्कि ऋषियों, ज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन की भी भूमि रही है। इस महत्वपूर्ण संस्थान को नई पहचान देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शोध संस्थान का कार्य जल्द शुरू किया जाए और कुंभ मेला शुरू होने से पहले ये कार्य पूर्ण हो जाएं।

उन्होंने प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु को निर्देश दिए कि संस्थान के कार्यों की नियमित प्रगति के लिए संबंधित विभागीय सचिवों के साथ पाक्षिक बैठकें की जाएं। इसमें विकास के साथ विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जनपदों की लोक कला पर आधारित गतिविधियां भी इसमें शामिल की जाएं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थान में वैदिक गणित, वेदों में निहित विज्ञान, उपनिषदों का दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र, पर्यावरण विज्ञान तथा जीवन मूल्यों पर आधारित शोध और अध्ययन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित और त्रिकोणमिति जैसे महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत दिए हैं। आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर जैसे महान विद्वानों के योगदान को शोध और शिक्षा से जोड़ा जाए।

बैठक में जानकारी दी गई कि ज्ञान, योग, ध्यान और भारतीय अध्यात्म की समृद्ध परंपराओं को संस्थान में वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित किया जाएगा। जिसमें शैक्षणिक क्षेत्र के श्रुति केन्द्र में वेद, उपनिषद व शास्त्रीय ज्ञान की परंपरा, दर्शन केन्द्र में भारतीय दर्शन व चेतना के गहन विचार, आयु केन्द्र में आयुर्वेद व समग्र स्वास्थ्य विज्ञान के माध्यम से जीवन का संतुलन, विज्ञान केन्द्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों व पारंपरिक विज्ञान की विरासत और कला केन्द्र में भारतीय कला, संस्कृति एवं सौन्दर्य परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में विकसित किया जाएगा।

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