हरिद्वार।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में सेवा संकल्प अभियान–2026 (विकसित भारत 2047) के तहत ‘विकसित डिजिटल भारत 2047’ विषय पर विशिष्ट व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिज्ञासा विश्वविद्यालय के आईक्यूएसी निदेशक प्रो. मनीष शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में डिजिटल तकनीक की भूमिका पर विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे ने की।
प्रो. मनीष शर्मा ने कहा कि डिजिटल तकनीक आधुनिक भारत के विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला है। डिजिटल शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑनलाइन सेवाओं, नवाचार और तकनीकी कौशल के प्रभावी उपयोग से देश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए युवाओं को डिजिटल रूप से दक्ष और सामाजिक दायित्वों के प्रति संवेदनशील बनाना आवश्यक है।
विवि के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे ने कहा कि विकसित राष्ट्र के निर्माण में शिक्षण संस्थानों और युवाओं की भूमिका अहम है। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक का समन्वय देश को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का सकारात्मक, रचनात्मक और नैतिक उपयोग करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. सुशील चमौली ने किया। सह-नोडल अधिकारी मीनाक्षी सिंह रावत ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया। अंत में डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में नवाचार, तकनीकी दक्षता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में सहायक हैं।
