ज्ञान भारतम मिशन के तहत हरिद्वार में प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की पहल
ब्यूरो
Posted no : 06/08/2026
हरिद्वार।
भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत हरिद्वार जिले की प्राचीन सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर को सहेजने का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। इस पहल के माध्यम से जिले के विभिन्न आश्रमों, मठों, मंदिरों, विश्वविद्यालयों और संग्रहालयों में वर्षों से संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों, ताड़पत्रों और भोजपत्रों की जानकारी जुटाई जा रही है। ताड़पत्र और भोजपत्र जैसे पारंपरिक माध्यमों की एक सीमित आयु होती है, इसलिए इन्हें आधुनिक एआई (AI) तकनीक के जरिए डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि भारत की यह अनमोल ज्ञान-परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव सुलभ रहे।
मिशन को आगे बढ़ाने के लिए जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है। हरिद्वार के सीडीओ ललित नारायण मिश्र ने बताया कि यह समिति क्षेत्र के सभी ऐतिहासिक और पौराणिक दस्तावेजों का सत्यापन करेगी। सीडीओ के अनुसार, सत्यापन के बाद इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ना केवल इनके नष्ट होने को रोका जा सकेगा बल्कि शोधकर्ताओं और आम जनता को भी देश के समृद्ध इतिहास से आसानी से जुड़ने का मौका मिलेगा।
हरिद्वार स्थित संस्कृत अकादमी और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में सैकड़ों वर्ष पुरानी बहुमूल्य पांडुलिपियां मौजूद हैं। उदाहरण के तौर पर, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के संग्रहालय में ही हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म के पौराणिक इतिहास से जुड़ी लगभग 400 दुर्लभ पांडुलिपियां संरक्षित हैं। ज्ञान भारतम मिशन के तहत तकनीक और आधुनिक विज्ञान का सहारा लेकर हरिद्वार की इस प्राचीन और पौराणिक धरोहर को एक नया जीवन दिया जा रहा है।
