हरिद्वार।
उत्तराखंड संस्कृत संस्थान की ओर से आयोजित 18वें संस्कृत महोत्सव के तहत राज्य स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि महाराज ने कहा कि संस्कृत भाषा संस्कृति की वाहक और सभी संस्कारों की जननी है। यह भय को दूर कर भावों को जागृत करती है और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना की प्रेरणा देती है। संस्कृत देवभाषा होने के साथ ही संगम और संयम की भाषा भी है। वह शुक्रवार को भूपतवाला स्थित महाजन भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव एवं प्रतियोगिता के मुख्य समन्वयक डॉ. विनय कुमार विद्यालंकार ने बताया कि विकासखंड और जनपद स्तर पर आयोजित संस्कृत प्रतियोगिताओं में प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा प्रधानाचार्यों सहित 50 हजार से अधिक व्यक्ति सम्मिलित रहे। इनमें सरकारी और निजी विद्यालयों, केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, गुरुकुलों और संस्कृत विद्यालयों के प्रतिभागी शामिल रहे। तथा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 13 जिलों के प्रथम स्थान प्राप्त 1 हज़ार से अधिक प्रतिभागी और उनके सहयोगी शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं।

मुख्य अतिथि उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार गैरोला ने कहा कि संस्कृत की विभिन्न प्रतियोगिताओं से व्यक्तित्व का निर्माण होता है और प्रतिभाओं को निखरने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं नगर निगम हरिद्वार की महापौर किरण जैसल ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, संवर्धन और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

समारोह में उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. नवीन चंद्र पंत, संस्कृत शिक्षा निदेशक मंजू भारती, उपनिदेशक एवं संस्कृत शिक्षा हरिद्वार के सहायक निदेशक डॉ. वाजश्रवा आर्य, संस्थान की वित्त अधिकारी माया देवी और संस्कृत भारती उत्तराखंड के प्रांत अध्यक्ष डॉ. आनंद भारद्वाज डॉ विजय कुमार त्यागी , डॉ केशव दत बलियानी, डॉ रोशन लाल गौड़, घनश्याम उनियाल, डॉ सुशील कुमार त्यागी, डॉ राधेश्याम बहुखण्डी, मनोज शर्मा, उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के प्रशासन अधिकारी डॉ किशोरी लाल रतूड़ी, प्रशासनिक अधिकारी लीला रावत, जगतनयन बहुखण्डी, कुलदीप मेंदोला, तारादत अवस्थी आदि उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. मूलचंद शुक्ल द्वारा रचित ‘कालिदास लघुत्रयी’ पुस्तक का विमोचन किया गया।संचालन संस्थान के शोध अधिकारी एवं राज्य समन्वयक डॉ. हरीश चंद्र गुरुरानी ने किया।

पहले दिन हुईं आठ स्पर्धाएं

प्रतियोगिता के पहले दिन कनिष्ठ वर्ग में संस्कृत समूह नृत्य, आशुभाषण, वाद-विवाद और समूहगान आयोजित किए गए। वरिष्ठ वर्ग में संस्कृत नाटक, समूह नृत्य, आशुभाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं हुईं। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। पतंजलि गुरुकुलम, टिहरी की छात्राओं ने वैदिक मंगलाचरण और वंदे मातरम् प्रस्तुत किया।

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