फार्मा इंडस्टरीज के लिए नए स्टैंडर्ड लागू, एकम्स टाउन हॉल में ADPI ने आयोजित की बड़ी सेमिनार

फार्मा इंडस्टरीज के लिए नए स्टैंडर्ड लागू, एकम्स टाउन हॉल में ADPI ने आयोजित की बड़ी सेमिनार

ब्यूरो

Posted no : 10/06/2026

हरिद्वार।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संस्था इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) और एसोसिएशन ऑफ देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज (उत्तराखंड) के संयुक्त रूप से एक दिवसीय वैज्ञानिक सम्मेलन और संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया।

सिडकुल स्थित एकम्स टाउनहॉल में आयोजित साइटिफिक कॉन्क्लेव और इंटरएक्टिव सेशन का उद्देश्य देश में दवा निर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर के अनुकूल बनाना है। इस कॉन्क्लेव में उत्तराखंड के सभी औद्योगिक क्षेत्र के फार्मा इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

शुद्ध दवा निर्माण को लेकर चर्चा

सेमिनार में मुख्य रूप से चर्चा की गई कि दवाओं के उत्पादन और उनकी शुद्धता को कैसे बेहतर बनाया जाए। बदलते समय और वैज्ञानिक प्रगति के साथ दवाओं में होने वाली अशुद्धियों को न्यूनतम स्तर पर लाने और मरीजों तक पूरी तरह सुरक्षित व सटीक प्रभाव वाली दवाएं पहुंचाने के लिए नए तकनीकी मानकों को समझने पर जोर दिया गया।

1 जुलाई से लागू होंगे नए स्टैंडर्ड

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और IPC के वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलेसेल्वन ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा लॉन्च किए गए IP 2026 के नए नियमों को आगामी 1 जुलाई से देश भर में लागू कर दिया जाएगा। अब सभी दवा निर्माता कंपनियों को इन अपग्रेड किए गए मानकों और मोनोग्राफ का पालन करना अनिवार्य होगा।

​एसोसिएशन ऑफ देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष संदीप जैन ने कहा कि इस सत्र के माध्यम से उद्योग जगत के लोगों को नए नियमों को समझने में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और संशयों को दूर कर उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि भारतीय दवाओं की साख वैश्विक बाजार में और मजबूत हो सके। सेमिनार में प्रदेश भर से सैकड़ो की तादाद में आए फार्मा कंपनियों के प्रतिनिधि संवाद का हिस्सा बन रहे हैं।

 

उत्तराखंड राज्य के ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह भी प्रमुख रूप से सेमिनार में शामिल हुए। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हर प्रकार की दवा निर्माण के लिए स्टैंडर्ड लागू किया जाता है। जो की देशभर में आईपी के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के माध्यम से सभी दवा उत्पादकों को एक छत के नीचे लाकर नई स्टैंडर्ड के बारे में जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है।

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