राष्ट्रगीत के 150 साल पूरे, हरिद्वार में भी आयोजित हुआ स्मरणोत्सव कार्यक्रम

राष्ट्रगीत के 150 साल पूरे, हरिद्वार में भी आयोजित हुआ स्मरणोत्सव कार्यक्रम

ब्यूरो

Posted no : 07/11/2025

हरिद्वार।
राष्ट्रगीत वन्दे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उलक्ष्य में ऋषिकुल आर्वेदिक महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका जनपद के प्रभारी और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने दीप जलाकर उद्घाटन किया। इस मौके पर उपस्थित जनसमूह द्वारा राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम गाया गया। इसके बाद दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम को बड़ी एलईडी स्क्रीन पर लाइव देखते हुए प्रधामनंत्री के भाषण को सुना। जनपद के विभिन्न संस्थानों, विद्यालयों और कार्यालयों में वन्दे मातरम कार्यक्रम का आयोजन किया गया तथा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी सुना गया।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक साल तक मनाए जाने वाले स्मरणोत्सव की दिल्ली से शुक्रवार को शुरुआत की। इस मौके पर प्रधानमंत्री द्वारा एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। देश के स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित करने और राष्ट्रीय गौरव एवं एकता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाने वाले राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है,जोकि तीन चरणों में एक वर्ष तक चलेगा।

इस मौके पर जिला प्रभारी एवं कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर सभी को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 01 अक्टूबर, 2025 को निर्णय लिया कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में भव्य उत्सव आयोजित किए जायें। उन्होंने इस दूरदर्शी निर्णय के लिए देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से इस गौरवमय उत्सव का आयोजन पूरे देश में किया जा रहा है। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि 07 नवंबर 1875 को पुनर्जागरण काल के प्रमुख साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् गीत आज 150 वर्ष पूर्ण कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह गीत केवल शब्दों का संयोजन नहीं है बल्कि यह गीत भारत की आत्मा की आवाज है। इस गीत ने आजादी की लड़ाई में राष्ट्र को एकसूत्र में पिरोने का काम किया है। इस गीत ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला कर रख दी थीं।

उन्होंने कहा कि यह वह गीत है जिसे आजादी के दिवानों ने गाते हुए फांसी के फंदों को चुमकर गले लगाया था। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम स्वदेशी आंदोलन और आजादी की लड़ाई का प्रेरक नारा भी रहा है। उन्होंने ककहा कि श्री बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, अमर शहीद भगत सिंह और सुभाषचंद्र बोस जी जैसे क्रांतिकारियों ने इसे अपनी प्रेरणा बनाया। यह हर देशवासियों के हृदय में बस गया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने इसके प्रभाव से भयभीत होकर इस गीत के प्रयोग पर प्रतिबंध भी लगाया था। उन्होंने हा कि राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के इस आयोजन को आज पूरे देश में राष्ट्रभक्ति, आत्मगौरव और एकता के राष्ट्रव्यापी उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।

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