उत्तराखंड संस्कृत विवि में नुक्कड़ नाटक के जरिए छात्रों ने दिया ‘संस्कृत–भारत की विरासत, भविष्य का आधार’ का संदेश

उत्तराखंड संस्कृत विवि में नुक्कड़ नाटक के जरिए छात्रों ने दिया ‘संस्कृत–भारत की विरासत, भविष्य का आधार’ का संदेश

हरिद्वार।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में ‘सेवा संकल्प अभियान–विकसित भारत 2047’ के तहत ‘संस्कृत–भारत की विरासत, भविष्य का आधार’ विषय पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संस्कृत की गौरवशाली परंपरा, भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति में उसके योगदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के जरिए संस्कृत के महत्व और विकसित भारत के निर्माण में उसकी भूमिका का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने कहा कि संस्कृत भारत की ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपरा की आधारभूत भाषा है। विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए युवा पीढ़ी को संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक संदर्भों में इसके व्यापक उपयोग से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ ही देश के ज्ञान-आधारित विकास को भी मजबूती दी जा सकती है। नोडल अधिकारी प्रो. बिंदुमती द्विवेदी ने कहा कि संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के माध्यम से भारतीय ज्ञान-विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुंचाना राष्ट्रसेवा का महत्वपूर्ण कार्य है।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. राजेश चन्द्र सती ने कहा कि नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संस्कृत के महत्व और विकसित भारत के निर्माण में उसकी भूमिका का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। डॉ. अनूप बहुखंडी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर सह-नोडल अधिकारी मीनाक्षी सिंह रावत, डॉ. रूपेश शर्मा, डॉ. परविंदर, डॉ. धीरज, पुस्तकालय अध्यक्ष मनमीत कौर, निजी सचिव मनोज गहतोड़ी सहित विश्वविद्यालय के आचार्य, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

ब्यूरो

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