बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में मददगार ‘सुवर्णप्राशन’, हरिद्वार में अभिभावकों के बीच बढ़ा क्रेज
हरिद्वार।
बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक पद्धति से किए जाने वाले सुवर्णप्राशन को लेकर अभिभावकों में जागरूकता बढ़ रही है। हरिद्वार में ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज के बाल रोग एवं बहिरंग विभाग में पुष्य नक्षत्र पर विशेष सुवर्णप्राशन शिविर आयोजित किया जाता है। शिविर में नवजात शिशुओं से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों का सुवर्णप्राशन कराया जाता है। हर महीने 200 से अधिक बच्चे शिविर में पहुंच रहे हैं।
लंबे समय से अपने बच्चों को सुवर्णप्राशन करा रहे अभिभावक मान रहे हैं कि उन्हें बच्चों के स्वास्थ्य एवं विकास में सकारात्मक बदलाव नजर आ रहा है। अभिभावक शुभम अग्रवाल ने बताया कि नियमित रूप से सुवर्णप्राशन कराने के बाद उन्हें बच्चे का बेहतर विकास हो रहा है। वहीं अभिभावक उमा शर्मा ने भी इसे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि शिविर में चिकित्सकों की देखरेख में यह प्रक्रिया कराई जाती है।
ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज की एचओडी प्रो. कीर्ति वर्मा के अनुसार कॉलेज में वर्ष 2018 से लगातार सुवर्णप्राशन कराया जा रहा है। हर वर्ष करीब ढाई हजार बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है और शिविर में पहुंचने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में सुवर्णप्राशन को बच्चों के स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी पारंपरिक प्रक्रिया माना गया है।
प्रो डॉ. रीना दीक्षित के मुताबिक सुवर्णप्राशन में स्वर्ण के साथ विभिन्न औषधीय घटकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उपयोगी माना जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी औषधि या प्रक्रिया का उपयोग चिकित्सकीय परामर्श और विशेषज्ञों की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।

