​हरिद्वार।
उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थानम् द्वारा प्रदेश की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार और संवर्धन के लिए 18वें संस्कृत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय, निजी और मान्यता प्राप्त विद्यालयों, महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए 95 विकास खण्डों और 13 जनपदों में 6 प्रकार की (नाटक, समूहगान, समूहनृत्य, वादविवाद, आशुभाषण और श्लोकोच्चारण) संस्कृत स्पर्धाएं आयोजित होंगी।

स्पर्धाओं के सफल संचालन के लिए शुक्रवार को हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् सभागार में मुख्य शिक्षा अधिकारियों द्वारा नामित 110 खण्ड संयोजकों, जनपद संयोजकों एवं सह संयोजकों को एकदिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना से आरम्भ हुए कार्यक्रम में संस्थानम् के सचिव और मुख्य समन्वयक प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार ने बताया कि 23-24 सितम्बर को विकास खण्ड, 07-08 अक्टूबर को जनपद तथा 24-25 अक्टूबर को राज्य स्तर पर हरिद्वार में ये स्पर्धाएं होंगी। इन प्रतियोगिताओं में प्रथम आने वाले प्रतिभागियों को अक्टूबर माह में आयोजित होने वाली प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में पुरस्कृत किया जाएगा।

​संस्थानम् की वित्त अधिकारी माया देवी ने बताया कि विजेताओं के लिए विकास खण्ड स्तर पर प्रत्येक खण्ड में रु. 18,000/-, जनपद स्तर पर प्रत्येक जनपद में रु. 37,800/- तथा राज्य स्तर पर कुल रु. 2,84,000/- की पुरस्कार राशि व प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। खण्ड स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागी जनपद स्तर तथा जनपद में प्रथम आने वाले राज्य स्तर पर प्रतिभाग करेंगे। स्पर्धाओं के राज्य संयोजक व शोध अधिकारी डॉ. हरीशचन्द्र गुरुरानी ने सभी संयोजकों को मुख्य नियमों से अवगत कराया एवं उनकी समस्याओं का निवारण किया।

​इस मौके पर प्रकाशन अधिकारी किशोरी रतूड़ी, प्रशासनिक अधिकारी लीला रावत, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष रमा कठैत, कनिष्ठ सहायक मनीषा, विवेक पंचभैया, अनुराग, आकांक्षा, बेबी, मोहित, प्रितम, सुन्दर, ओम प्रकाश भट्ट, सन्तोष, पंकज, विनय, सुनील व अंकित समेत समय लोग शामिल हुए।

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