हरिद्वार।
पतंजलि विश्वविद्यालय में 29 से 31 अक्टूबर तक 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन (AIOC) का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन में देशभर के प्रमुख धर्माचार्य, शंकराचार्य, संस्कृत विद्वान और आध्यात्मिक गुरु शामिल होंगे। आयोजन में सनातन शास्त्र शुद्धिकरण अभियान का शुभारंभ भी किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में करीब चार से पांच हजार संस्कृत विद्वानों के भाग लेने की संभावना है।
सम्मेलन के संबंध में बुधवार को कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर, कृपालु बाग आश्रम में आयोजित प्रेसवार्ता में स्वामी रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म के ग्रंथों की गलत व्याख्याओं और उनमें कथित प्रक्षेपों की पहचान कर प्रामाणिक स्वरूप सामने लाने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐतिहासिक रूप से कुछ विदेशी विद्वानों और शासकों ने सनातन धर्म के ग्रंथों की गलत व्याख्या की और उनमें मिलावट की गई।
स्वामी रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म में सभी जातियों और स्त्री-पुरुषों को समान महत्व दिया गया है तथा वर्ण व्यवस्था कर्म आधारित है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित अभियान के तहत वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, पुराणों और स्मृति ग्रंथों के पाठों व भाष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
प्रेसवार्ता में पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण भी मौजूद रहे। योग गुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने सम्मेलन को गैर-राजनीतिक बताते हुए इसे सनातन संस्कृति और प्राच्य विद्या पर विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बताया।
